महान धावक ‘फ्लाइंग सिख’ मिल्खा सिंह की प्रेरक कहानी ....



हर खेल जोश, जूनून और जिद से जीता जाता है, और इस आदमी में ऐ कूट कूट कर भरा था। और इनके बलबूते मिल्खा सींग ने इतिहास रचा हा हम मिल्खा सिंग की बात कर रहे है।  फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंग को कौन नहीं जानता। इस महान धावक का, का  करोना महामारिसे झूझते  मौत हो गयी। जब हम उनके जीवन के बारेमे सुनते है  या पढ़ते है  हमें दीखता है  उनका संघर्ष। उनका जीवन  बहोत  संघर्षमय रहा  है।   मिल्खा सिंह देश के ऐसे पहले एथलीट हैं जिन्होंने कॉमनवेल्थ खेलो में भारत को स्वर्ण पदक दिलवाया है।

"हाथ  की लकीरोसे जिंदगी नहीं बनती अजम हमारा  भी कुछ हिसा है जिंदगी बनानेमे"। ऐ पंक्तिया कीसी शायर या कवि की नहीं बल्की मिल्खा सींग ने अपनी जिंदगी पर कही थी। मिल्खा सींग का चंडीगढ़ में निधन हो गया। वो कोरोना बीमारिसे जूझ रहे थे।91 साल की उम्र में उन्होंने इस जग से अलविदा ले लिया।
आज वो हमारे बिच में नहीं है। तो हम इस लेख में उनके जीवन पर प्रकाश डालेंगे। जानेंगे उनके प्रेणादायी जीवन के बारेमे

”फ्लाइंग सिख” मिल्खा सिंह की जीवन  कहानी– Milkha Singh Biography in Hindi.

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Name :Milkha sing 
Nick name: flying sikh,फ्लाइंग सिख
Birthplace जन्मस्थान : लिएलपुर पाकिस्तान
Wife Name: निर्मला कौर
Children बच्चे : चार, 2 बेटे एक बेटा
सन्मान : पद्मश्री 
मृत्यु Death  : १८ जून २०२१


मिल्खा सिंह का जन्म,  प्रारंभिक जीवन ,बचपन, परिवार, शिक्षा एवं – Milkha Singh History in Hindi :

मिल्खा सींग का जन्म 20 नवंबर 1929 लियालपुर में हुव्हा।  उनका बचपन बहोत विषम परिस्तिथियौमे गुजरा। सुरवात से उनका जीवन काफ़ी संघर्ष भरा था। जब  भारत और पाकिस्तान का बटवारा हुवा तो  इसने बहोत सी मुश्किलें उनपर डाली। बटवारे  की वजसे हुए दंगों में उनके माता पिता का क़त्ल उनके सामने हुवा। फिर मिल्खा सींग बड़ी मुश्किल से भारत में आ गए और  सुरवात में कैंप में रहे। 

जिस उम्र में बच्चे खेल  कूद करते है उस उम्र में मिल्खा सींग को हर चीज के लिए संघर्ष करना था। एक वक़्त के खाने के लिए भी तरसते  थे ऐसे परिस्थितिया बनी थी। बेहतर जीवन जीने के लिए उन्होंने बहोतसे सहारे तलाशे, कभी ढाबे पे बर्तन धोये तो कभी दुकान के छोटे मोटे काम किये। और वो क

फिर बड़े होने के बाद उन्होंने फौज में भरती के लिए तयारी की पर वो काफी बार असफल हुए । उन्हें लगता था की फ़ौज में जानेसे उनकी जिंदिगी और भी बेहतर बन जाएगी ।आखिर कर फ़ौज में भरती हुए । वहा  उनके कुछ अफसरोने उन्हें दौड़ की प्रतियोगिता में हिस्सा लेंनेके लिए प्रोसाहित किया । अब तक जिन्दगीकी रेस में दौडे मिल्खा सिंग के लिए इस दौड़ में दौड़ना मुश्किल नहीं था । बहोत अभ्यास किया मेहनत की और सबसे अछे धावक बन कर उभरे । बहोत से मेडल्स अपने नाम दर्ज किये । बहोत सी सुर्खिया बटोरी

एशियाई ओलिंपिक खेलो में उन्होंने बहोत अच्छा प्रदर्शन किया  । पाकिस्तान से उन्हें नौता आया वहा भी गए और अयूब खान को हराया , और तबसे कहलने लगे फ्लाइंग सिख। उनके पास जोश जूनून जिद्द तो थी ही इसके साथ था देश का नाम उचा करनेका जज्बा ।  उनकी दिली ख्वाइश थी की ओलिंपिक में भारत  को पदक हासिल हो 

1956 में प्रथम बार मेलबर्न ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

1958 साल में येशियाई गेम में उन्होंने 200और 400 मीटर में गोल्ड मैडल जीते।



फ्लाइंग सिख लव स्टोरी  वैवाहिक एवं निजी जीवन – Milkha Singh Life Story

मिल्खा सींग के जीवन में तीन महिलाये  आयी,  पर उन तीनोमेसे उन्होंने किसीसे शादी नी की। आखिर कार मिल्खा सींग को उनकी ड्रीम वीमेन मिल गयी। उनको निर्मला कौर से प्यार हो गया। और दोनों की ऐ लव स्टोरी दिल्ली के नेशनल स्टेडियम से सुरु हुई और दोनों लगभग 60 साल तक साथ  रहे। 

दरसल  मिल्खा सींग और निर्मला कौर की पहली मुलाक़ात कोलम्बो में हुई थी। दोनों वहा टूर्नामेंट के लिए गए थे। निर्मला कौर इंडियन बॉलीबाल टीम की कप्तान और मिल्खा सींग इंडियन अथलेट की तरफ से खेल में हिस्सा लिया था। जिसके बाद मिल्खा सींग को निर्मला कौर से एकतरफा प्यार हो गया। बाद में मेल जुल बढ़ गया।

 एक बार हुव्हा यु की जब वो स्टेडियम पे मिले तब पेपर  नहीं था तो उन्होंने अपने रूम का नंबर निर्मला कौर के हाथ पर लिख  दिया था। इसके बाद दोनों ने जब  साथ होने का फैसला लिया तब दोनों के परिवार की तरफसे काफ़ी दिक्क़ते आयी। घरवाले शादी के लिए तयार नहीं थे तब उस वक़्त के पंजाब के मुख्यमंत्री रहे प्रताप सींग ने दोनों के परिवार को मनाया  और ऐ जोड़ा 1962 में शादी के बंधन  में बंध गया।
उनको तीन बेटियां और एक बेटा है। मोना सिँह, आलिया ग्रोवर,सोनिया सवाकर और बेटे का नाम जीव मिल्खा सींग।
 

 some Facts About Flying Sikh Milkha Singh : मिल्खा सिंह के बारे में अनसुनी बाते 

    • मिल्खा सिंग इंडियन आर्मी में जाना चाहते थे पर असफल होते थे लगातार चार बार प्रयास करनेके बाद वो इंडियन आर्मी में शामिल हुए और उनकी लाइफ ने वहा एक अलग मोड़ लिया।
    • आर्मी में गुरदेव सिंग ने इनका मार्गदर्शन किया।
    • मिल्खा सिंग चलती ट्रेन के साथ दौड़ लगाते थे।
    • मिल्खा सिंग का स्कूल दस किलोमीटर दूर था तो वो कभी पैदल भागते दौड़ते स्कूल जाते थे।
    • "The flying sikh " का किताब उनको पाकिस्तान के राष्ट्रपति आयुब खान ने दिया।
    • खेलोमे अछे प्रदर्शन की वजसे उन्हें उन्हें आर्मी में जूनियर कमीशन का पद मिला।
    •  साल 1999 में, मिल्खा ने ७ साल के  लड़के हवलदार सिंह को गोद लिया था।  टाइगर हिल में मारा गया।

Milkha Singh Movie मिल्खा सिंग के जीवन पर मूवी:

race of my life मिल्खा सिंग की जीवनी है जो उन्होंने अपनी बेटी के साथ लिखी और  राकेश मेहरा ने उसपर मूवी बना डाली जो बॉक्स ऑफिस पर बहोत पसंद की गयी भाग मिल्खा भाग .इसमें मिल्खा सिंग की भूमिका फरहान अख्तर नि निभाई जिसकी बहोत सरहना हुयी और फिल्म ने बहोत सारे अवार्ड्स भी अपने नाम करले

मिल्खा सींग बने " flying sikh ": कैसे पड़ा  फ्लाइंग सिख नाम :

मिल्खा सींग कई रेस दौड़ने के बाद उनको पाकिस्तान से 1960 स्पर्धा पाकिस्तान के और एशिया के बेहतरीन धावक अब्दुल खालिद  के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए बुलावा आया। पर जिन्होंने अपने माँ बाप का खून अपने सामने होते हुए देखा हो जिस जमीपर दंगे खून देखा वो इंसान उस मुल्क वापस कैसे जायेगा। सुरवात में मिल्खा सींग ने जानेके लिए  ना बोल दिया। पर  तब हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित नेहरूने उनको समझाया खेल भाईचारेको बढाता है। तब जाके वो मान गए और स्पर्धा के लिए तयार हुए। 

पुराने कड़वी यादें लम्होंको किनारा करके वो पाकिस्तान पहुचे। रेसिंग के मैदान में जब वो उतरे तब लोगो को लगा ऐ दुबला पतला आदमी क्या दौड़ेगा,  अरे ये रेस मे टिक भी नही पायेगा। तब मिल्खा सींग ने सबको गलत साबित करके  अब्दुल खालिद को पछाड़ दिया और अपनी शानदार दर्ज की । और तब पाकिस्तान के जैनरल आयुब खान ने कहा की मिल्खा जी आप  दौड़े नहीं उड़े हो और इसी के साथ उनके नाम के पीछे फ्लाइंग सिख का टाइटल जुड़ गया।। "फ्लाईनग सीख" के नाम से लोग उन्हे जाणने लगे। और मै आपको बता दु की,  उस वक़्त स्टेडिअम में बैठी  दस हजारसे ज्यादा औरतों ने अपना बुरखा उठाया सिर्फ मिल्खा सिंग को देखने के लिए।

Milkha Singh Death मिल्खा सिंग जी की मृतु :

काफी लम्बे समय तक कोरोना महामरिसे झुझते आचानक तब्येत और बिघडनेकी वजसे  १८ जून  २०१ को उन्होंने इस दुनिया से अलविदा ले लिया। और दुःख की बात की इनके मृतु से पहले इनके धर्मपत्नी की भी मृतु हुयी। आखिर कार लगभग ६० साल तक वो साथ रहे और मृतु ने उन्हें अलग कर दिया। भलेही आज वो हमारे बिच नहीं है पर वो आने वाली पिढी को एक स्फूर्ति और प्रेरणा का स्त्रोत बने रहेंगे .




  •   मिल्खा सिंह की मृत्यु कब हुई थी ? milkha singh death? --18 june 2021
  • मिल्खा सिंह  के पत्नी का नाम क्या है? Milkha Singh wife name? : --निर्मल सैनी
  •  मिल्खा सिंह  के जीवनी का नाम क्या है? ( what is Milkha Singh autobiography name?  (The Race of My Life) “द रेस ऑफ़ माय लाइफ”
  • age of milkha sing when he die मिल्खा सिंग जी की उम्र :   ९१ साल 
  •  मिल्खा सिंग जी के बेटे का नाम क्या है :   jeev milkha singh 
  • मिल्खा सिह किस खेक से सबंधित है  milkha sing is realted  to which sport ? track and field sprinter

उम्मीद करते हैं आपको milkha sing की ये जीवनी अछि लगी हो और  और आपको जीवन में आगे बढ़ने की कुछ करनेकी प्रेरणा और उम्मीद मिली होगी.  हमें कमेंट कर के जरूर बताएं कि आपको ये जानकारी  कैसी  लगी धन्यवाद . 

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