stock market Important Financial ratios for investor in hindi...

 "शेअर बाजार में निवेश कर रहे हो तो हर निवेशक को stock market ratios ग्यात होने चाहिए ही चाहिये उससे हमे पता चलता है कि कोई कंपनी निवेश के लिए कितनी सही है या गलत "



    Stock market ratios in hindi  



share market ratio  इन हिंदी 








तो हम बात करंगे स्टॉक मार्केट के रेशोस के  बारेमे Most important financial share market ratio to analyze a company जब हम Fundamental analysis of stock market (शेयर बाजार मूलभूत विश्लेषण) की बात करते है तो उसमें हम बहोत सारि चीजे देखते है जैसे कि कंपनी का बॅलन्स शीट्स  मुनाफा  घाटा ये सारी चीजें । मूलभूत विश्लेषण में  उसमे ratios  महत्वपर्ण भूमिका निभाते है  ratios से हमे पता चलता है कि असल मे कंपनी में क्या चल रहा है । तो इस पोस्ट में हम जानेंगे कि: 


1)   stock market ratio financial ratios से आप कैसे फटाक से कंपनी  का मूलभूत विश्लेषण कर सकते है

2)  share market ratio का क्या महत्व है और कैसे उन्हें हम  calculate कर सकते है

3)  PE रेश्यो की अहमियत 

4)  share market ratio कैसे हमें मदत करते है एक कंपनी को दूसरी कंपनी से तुलना  करने के लिए

5)  पता चलता है किसी कंपनी का Management कैसे है कंपनी का व्यापार सही ढंग से चल रहा है या नही

6)  कम्पनी निवेश के लिए सही है या नही।

निचे दिए पाच रेश्यो के बारेमे  विस्तार से जानेगे  तो चलिए समझते है।


1)    P/E ratio
2)    EPS
3)    Book value
4)    Dividend  Yield
5)    ROE

1) PE ratio- (price to earning ratio) (पी ई अनुपात)

सबसे पहला और  महत्वपूर्ण सूंदर रेश्यो. इस रेश्यो की अलग अलग व्याख्या की जाती है उसमें से सबसे लोकप्रिय व्याख्या आप एक रुपया कमाने के लिए कितने पैसे खर्च करने को तैयार है। इस रेश्यो से हमे पता चलता है कि कोई स्टॉक (overvalued)  महंगा या फिर (undervalued) सस्ता है। pe ratio ज्यादा, मतलब शेअर खरीदने के लिए ज्यादा पैसे हम दे रहे है और अगर pe ratio  कम मतलब शेअर सस्तेमें मिल रहा है। शेअर की कीमत बढ़ेगी तो pe ratio बढ़ेगा कम होगी तो pe ratio कम हो जाएगा। what is good pe ratio? 15 PE रेश्यो अच्छा माना जाता है। जब हम शेयर की cureent price को Eps से  devide करते है तब हमे PE ratio  मिलता है।

PE Ratio formula

फार्मूला:PE=stock price / Eps


2)EPS: (Earning per share) अर्निंग पर शेअर

किसी कंपनी में निवेश करना है या नही ये eps से हम पता लगा सकते है । eps मतलब एक शेयर के पीछे कंपनी कितने पैसे कमा रहे है। जितना ज्यादा eps उतना ही एक निवेशक के लिए अच्छा होता है।कंपनी का प्रॉफिट divide by बाजार में कंपनी के कितने शेअर है। जब आप ईपीएस देख रहे हो तब कंपनी के बाईट वर्षो का मतब की 10-15 साल का ईपीएस देखो अगर ये बढ़ रहा है इसका मतलब कंपनी ग्रोथ कर रही है, और ये निवेशक के लिए अच्छा संकेत होता है। बस आपको इसके साथ दूसरे ratios भी ध्यान में रखने है ।


Formula: Net value /number of shares



3) ROE :  (Return on equity) रिटर्न ऑन इक्विटी

एक निवेशक के लिए ईपीएस महत्वपूर्ण होता है वैसे ही कंपनी में जो भी अधिकारी लोग होते है उनके लिए ROE बढ़ना महत्वपूर्ण होता है। यहा पर return  का मतलब मुनाफा और इक्विटी मतलब भांडवल सरल भाषा मे बोले तो कंपनी के पास जो शेअर बेचके कितना भांडवल जमा हुवा है और उसपे हमे कैसे मुनाफा करके दिया  जा रहा है।सरल भाषा मेROE हमे बतात है कि इन्वेस्टर से जो पैसे कंपनी ने लिए है जमा किये है  उस  पर कैसे कंपनी मुनाफा कमा रही है। अगर ROE बढ़ता है तो अपनेआप EPS बढ़ता है। एक कंपनी का roe दूसरे कंपनि के roe से जरूर तुलना करके देखे।


Formula of ROE: Net income/average shareholder equity

4)Book value:

 बुक वैल्यू क्या book value of share है किसी भी कंपनी का अगर कोई कर्जा है तो वो सब चुका कर जो भी कंपनी के पास बचता है उसे book वैल्यू कहते है। अब हम सरल भाषा मे समझते है । मान लीजिये की आपने 20 लाख का घर खरीद लिया है और उसमें से 5 लाख आपने बैंक से लोन लिये है और 5 लाख अपने frind से उधार लिए है तो ये 10 लाख का लोन लिया है आप ये 10 लाख चुकाकर आपके पास जो 10 लाख बचेंगे वो है आपकी बुक वैल्यू। अगर किसी वजसे कंपनी किसी मुसिबत में पड़ जाये या फिर बंद पैड जाए तो कंपनी उसके पास जो भी चीजे है उसे बेचकर पैसे इकठा कर सकती है।


5)Dividend yield :

 डिविडेंड क्या होता है?What is dividend yield बहोत से निवेशक  सबसे ज्यादा ध्यान देते है वो है डिविडेंड yeild के उपर। हालांकि किसी भी कंम्पनि को  डिविडेंट देना बन्धनकारी नही होता कंम्पनि चाहे तो डिविडेंड दे सकती है या फिर नही भी दे सकता । पर अगर कंम्पनि  अपने शेयरहोल्डर को डिविडेंट  दे रही है मतलब कंम्पनि अच्छे खासे मुनाफे में चल रही है। 

असल मे dividend yield होता है कि कंम्पनी जो भी मुनाफा होता है उसमेंसे  थोड़ी रक्कम या कुच शेअर शेयरहोल्डर्स को डिविडेंट के रूप में देती है। उदाहरण के तौर पर  मान लीजिए  कंपनी को 1000 रुपए मूनाफा सालभर में हुवा तो 500 रुपए कंपनी खुद के पास रखेगी और 500 शेयरहोल्डर्स में बांट देगी। 



यहा पर आप इस बात पर ध्यान दे कि अगर कोई कंम्पनि dividend नही देती इसका मतलब ये नही की ओ  घाटे में चल रही है शायद ये भी हो सकता है कि कंम्पनि और तररकी करना चाहती हो और बढ़ना चाहती हो और वो उसमे पैसे लगा रही है और उस वजसे वो डिविडेंट नही दे रही।  पर आम तौर पर जब डिविडेंड यील्ड देख रहे हो तो कम से कम कंपनी लगातार 6-7 साल से dividend दे रहे हो तो अच्छा माना जाता है। पर सिर्फ इस एक ही पहलू  को एक ही ratio को देखकर निवेश कर रहे हो तो ये  आपके लिए गलत भी साबित हो सकता  है इसलिए बाकी के ratios को भी बराबर ध्यान में रखके निवेश करना चाहिए।


> स्टॉक मार्केट क्या है और उससे पैसे कैसे कमाए 



तो हमने सिखा stock market ratio कितनी अहम् भूमिका निभाते है जब किसी भी कम्पनी का Fundamental analysis करते समय.हम stock market ratio की मदतसे कैसे हम एक कंपनी को दूसरी कंपनी से तुलना करके देख सकते है, और उससे हमें पता चलता है की किस कंपनी में निवेश करे या नहीं करे। आप भी जब किसी कंपनी का मुलभुत विश्लेषण  कर रहो तो सिर्फ एक ही रेश्यो की बजाय सब  ratio को देखकर निवेश करनेका निर्णय ले।


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