MDH masala king तांगेवाले से अरबपति बननेवाले की संघर्ष कहानी ..!!


 एक छोटी जगहसे सुरवात करके मसाला कारोबार को  संघर्ष के साथ एक अड़डील जिद के साथ  नई बुलन्दियो तक पहुचानेवाले एक सामान्य व्यक्ति से असामन्य व्यक्ति बननेका उनका सफ़र और वक्ता जब बदला तब वो  कैसे कहलाने लगे MDH king.


जिहा मै उनकी ही बात कर रहा हु मसलो के बादशा एम डी एच मसाले का मालिक हैरान करने देनी वाली ये है कहानी  महाशय धर्मपाल गुलाटी जी की कामयाबी की, उनके संघर्ष भरे जीवन की  तो चलिए जानते है तांगेवाले से अरबपति बननेका उनका सफ़र....!!


                  MDH Masala Owner Success Story



धर्मपाल गुलाटी  की जीवनी- DharamPal Gulati biography in Hindi.


  सियालकोट जो आज की दौर में पाकिस्तान में आता है वहां 27 मार्च 1923 में चुनीलाल और  चनन देवी को पुत्र रत्न प्राप्त हुवा जो बड़े होके कहलाये  महाशय धर्मपाल गुलाटी। धर्मपाल बडे हो रहे थे पर उसे स्कूल जाना पसंद नही था। मेहज 11 वर्ष की उम्र में उसने स्कूली शिक्षा  छोड़ दि। उसने  पाचवी भी पास नि करि थी। 


थोड़े बड़े होने के बाद उनके पिताजी ने उन्हें अलग अलग काम करवाये पर उन में भी उनका हात नही चला। उन्होंने कपड़ो का दुकान चलाया साबुन चावल बेची। जिस जगह वो रहते थे वह मुस्लिम लोग ज्यादा रहते थे और उनको मेहंदी लगानेका बड़ा शौक था तो उन्होंने मेहंदी भी बेचके देखी उसमे भी उनका मन नही लगा फिर उनके पिताजी ने उन्हें हार्डवेयर का दुकान खोलके दिया। उसमे भी एक हादसा होने के कारण उनके सिर पर चोट लगी थी तो वो भी उन्होंने  छोड़ दिया। 


18 साल की उम्र में उनकी शादी लीलावती के साथ हुई।शादी हो जानेके बाद उनके भी कंधेपर जिमेदारी आयी और फिर उन्होंने अपना पूरा वक्त अपने पिताजीके पुष्तैनी कारोबार में लगाने की ठान ली।


15 अगस्त को जब देश आझाद हुवा तब वो अपने साथ देश के बटवारेका दर्द भी साथ लाया। विभाजन ने उन्हें अपना घर छोडनेको मजबूर किया । उसके बाद वो अपनी पूरे परिवार के साथ  हिन्दुस्तान के  लिए निकल पड़े सियालकोट - अमृतसर - से होकर वो दिल्ली  में अपने बहन के पास आ पहुचे। उस वक्त उनके जेब मे सिर्फ 1500 रुपए थे। और मुठी में थी मेहनत करनेकी धमक। 


आगर उस वक़्त ओ ये सोच कर रहते की आब मेरा कुछ नही हो सक ता मेरा तो सब कुछ चला गया। इतनी सारी परेशानी का कहर मैं अब कैसे उठाऊंगा तब शायद वो इस मुकाम पे नही पोहच पाते। 


जब ओ दिल्ही में पहुचे तब कई नई परेशानीया  उनको सताने लगी। उनका परिवार बडा थ, और उन सबका पेट भरने के लिये  गुजर बसर करनेके लिए काम तो करना पड़ेगा ।


 फिर उन्होंने  उनके पास जो 1500 रुपये थे उनमेसे 650 रुपए का एक टांगा खरीदा। कुतुब रोड से करोल बाग में उन्होंने टांगा चलाया। 5 -6 महीने के बाद उन्होंने वो भी छोड़ दिया और अब उन्होंने अपना पुष्तैनी व्यवसाय करने की ठान ली। और तब अजमल खान रोड पर मसले की एक छोटीसी दुकान खोली और वही बाद में MDH मसाले को नई पहचान मिली ( MDH full form MAHASHIAN DI HATTI ) । तबसे उन्होंने कभी पीछे मुड़के नही देखा।


          mdh ownar old photo


सुरवात में उनको भी बहुत कठनाई आयी उस वक्त न  उनके पास कोई फैक्ट्री थी न कोई मशीन्स। सब काम उन्हें सुरवात में हातोसे ही करना पड़ता था। सुरवात में कमाई कम हो रही थी पर उन्होंने अपने प्रोडक्ट्स के गुणवत्ता के साथ कभी छेड़छाड़ नहीं कि । आहिस्ता आहिस्ता काम बढ़ता गया। वो कहते थे कि वो माल बहोत ही बधिया बनाते थे उनका माल A1 रहता था शायद इसलिए लोगो मे उनके मसाले इतने प्रसिद्ध हो गए।




एक किस्सा मैं आपको बतना चाहूंगा कि जब मसलो का कारबार जोरो शोरो पे था तब उन्होंने मसाले पीसने के लिए फैक्ट्री खोली। एक दिन जब वो वह जाच के लिए गए थे तब उनको पता चला कि मसालों में  मिलावट हो रही थी। तब उन्होंने वहा के प्रबंधक को चेतावनी दी ऐसी कोई भी हरकत बर्दास्त नही की जाएगी। इससे हमें पता चलता है कि उन्होंने अपना पूरा कारोबार ईमानदारी से किया गुणवत्ता के साथ कभी  कोई भी समझौता नही किया । उनके नाम मे ही था महाशय मतलब की आप ईमानदार हो आप जिमेदार हो। और किसी से धोकाधड़ी बैमानी ना करे। वो कहते थे कि अगर तुम किसी को धोका देकर या फिर बैमानी से पैसे कमाओगे तो आपको चैन की नींद नही आएगी।


एक आना दो आना से उन्होंने सुरवात करके अपना कारोबार करोड़ो तक पहुचाया। आज  1500 करोड़ रुपये का कारोबार MDH कर रही है।आज पूरे देश मे MDH मसालो की 22 फैक्ट्री है। आज कई सारे देशो में चाहे वो अमेरिका हो इंग्लैंड हो 100 से ज्यादा देशो में 70 से अधिक अपने प्रोडक्ट्स बेच रही है।


महाशय धर्मपाल गुलाटी जी को कई पुरस्कार से सन्मानित किया है उनमेसे देश का सबसे प्रतिष्ठित पद्म भूषण पुरस्कार  से भी नवाजा गया है।

 उनके बरमे कुछ खास बातें ये है कि वो खान पान का बहोत ख्याल रखते थे। ओ रोज सुबह जल्दी उठकर एक्सरसाइज भी किया करते थे।  उनको फोटो खिंचवाने का बडा शौक था। और आज की दौर में शारुख सलमान विद्यापन में दिखते है पर ओ अपने मसालों का  विद्यापन  खुद करते थे । शायद आपने भी कुछ साल पहले टेलीविज़न पर विद्यापन में उनको देखा होगा।


कोरोना काल मे पीड़ित होने के कारण वो कई दिनोंतक हॉस्पिटल में भर्ती थे और 3 दिसम्बर 2020  धर्मपाल गुलाटी का निधन उन्होंने इस जग से अलविदा ले लिया। आज वो हमारे बीच नही है पर उनका जीवन संघर्ष सबको प्रेरित करता रहेगा।


उनके जीवनसे कुछ सीखने वाली बाते:

1) संघर्ष: जब कोई उनके जीवन पर नजर डालता है तब हमें संघर्ष नजर आता है।उन्होंने बहोत संघर्ष करने के बाद ही जीवन मे बडा मुकाम हासिल किया, हालांकि कठनाई आयि फिर भी उन्होंने हार नही मानी और आगे बढ़ते रहे।


2) मेहनत:  उन्होंने हमें मेहनत करना सिखया। वो कहते है ना कि किसीकी सलाहसे रास्ते जरूर मिलते है,पर मंजिल तो खुद की मेहनत से ही मिलती है। अगर आप मेहनत करने के लिए तैयार है तो आप जीवन मे कुछ भी हासिल कर सकते है।


3) ईमानदारी: इंसान ईमानदार होना चाहिए दुकान और मकान बैमानी के पैसों से भी खरीदे जा सकते है। शायद ये भी एक राज था उनके कामयाबी का। उन्होंने अपना पूरा व्यापार ईमानदारी से किया। गुणवत्ता के साथ कभी समझौता नही किया। उन्होंने आपने पूरे जीवन मे यही सिखा ईमानदार बनना मेहनत करना और हर आने जाने वाले के साथ अच्छा बरताव करना।


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